Monday, June 13, 2011

गावो विश्वस्य मातरः -- गौ सेवा हि परमो धर्मः


जय -जय  श्री  गोपालजू  ---तेरी  गैया  रहीं  पुकार  !
लालच -लोभ  में  आईके  --- मारें -काटें  गौ  धिक्कार  !!
अ ---कृपया  ध्यान  रखें    - (एकादश  मन्त्राः )------------
1-कोई  भी  चाहे  कितना  भी  बड़ा  क्यूँ न  हो  --
2-चाहे  वो  गुरु  हो  चाहे  चेला  --
3-चाहे  वह  किसी  भी  विधि -मत -संप्रदाय -प्रवाह  का  आचार्य  ही  क्यों  न  हो  --
4-चाहे  वो  परमहंस  हो  ---
5-चाहे  वो  अकिंचित  वैष्णवाचार्य  हो  --
6-चाहे  वो  भक्तिमार्ग  पुरोधा  श्रेष्ठ  भक्त  हो  --
7-चाहे  वो  ( कथित ,, सच  में  ऐसा  कोई भी  नंदलाला - भगवान  - श्री  श्यामसुन्दर - गोविन्द - गोपाल - मदनमोहन  - श्री  राधावल्लभ  जी  के  अलावा  हो  ही  नहीं  सकता  ) कृष्ण  प्रेम  रससिन्धु  -लीलाधारी  -स्वयंप्रकट  अवतारी  युगपुरुष  हो  ---
8-चाहे  वो  महाचमत्कारी  फकीर -साधू-संत-महात्मा-गुरु  हो  --
9-चाहे    वो  संसार  का  सबसे  अधिक  चेला  वाला  गुरु  हो  --
10-चाहे  वो  पूर्ण  सत्यबादी  एवं  दानी  महापुरुष  हो  --
11-चाहे  वो  कोई  नया  सच्चा  या  झूंठा (मनगढ़ंत ,,सच में कोई भी भगवान श्री राम या श्याम के अलावा पूर्ण  भगवद अवतार -भगवान है ही नहीं है )  भगवान  ही  क्यों  न  हो  --
नोट -1-उसके  लिए  सर्वप्रथम  गौ  सेवा  अनिवार्य  है  --गौ  रक्षा  का  संकल्प  अनिवार्य  है  -
चाहे  वह  हरिनाम  रटता  हो  -चाहे  वह  हरिनाम  संकीर्तन  में  रत  हो -
उसके  लिए  गौ  सेवा  परमावश्यक    है  !!--
विना  गौ  सेवा  के  ज्ञान -भक्ति -योग -मोक्ष  कुछ  भी  नहीं  है  !!
नोट -2-यदि  कोई  गौसेवा  नहीं  करता  वह  संत -महात्मा -गुरु -भक्त  हो   ही  नहीं  सकता  !!
नोट -3-गौ  हत्यारे  या  हत्यारों  को  गौ  वेचने  वाले  नर -पिचास  हैं  !!
इन्हें  कठोरतम  दंड  मिलना  चाहिए  !!
नोट -4-जो  वैष्णव  या  सनातनी  इसे  पढ़कर  कमेंट्स  में  --
जय   गौ  माता  या  अन्य  कुछ  गौ  सेवा  में  नहीं  लिखे  तो  समझाना  वो  चांडाल  है  !!!!!!!
ब---कृपया  संकल्प  रखें  !!!!!!!!!!!!!!!!!(एकादश  -संकल्पा  )
1-गौ  माता  की  हमें  सेवा  करनी  है  - भगवान  ने  गौ  माता  को  हमें  पूजने  के  लिए  दिया  है   - हमें  गौ   माता  से  सेवा  लेने  का  कोई  अधिकार  नहीं  है  - यदि  कोई  भी  गैया -मैया  से  सेवा  लेता  हैं  तो  वह  महापाप  है  !!---
2-सबसे  पहले  गैया -मैया  के  सन्तानों  के  लिए  गैया -मैया  का  ढूध  है  उसके  बाद    उनके  पेट  भरने  पर  हम  गैया  -मैया  का  दुग्धामृत  अपने  लिए  ले  सकते  हैं  !!---
3-हष्ट -पुष्ट  सांडों  का  होना  गौ  सेवा  की  सच्ची  झलक  है  - यदि  किसी  गौशाला  में  हष्ट  -पुष्ट  सांड  नहीं   हैं  तो  वह  गौशाला  गौशोषण  शाला  है  !!
4-बछड़ों  का  वधिया  करन  भी  महापाप  है  !!
5-सांडों  को  आवारा  पीटने  व  भूखा  रहने  के  लिए  छोड़ना  भी  महापाप  है  !!
6-प्रत्येक  गौशाला  में  एक   सुयोग्य  पशु  चिकित्सा  अधिकारी  का  होना  परमावश्यक  है  !!
7-गौ  माता  से  प्रसाद  के  रूप  में  उसका  दुग्ध  न  लें  उसका  अनमोल  गोबर  व  मूत्र  ही   महाप्रसाद   है  !!
8-प्रतिदिन  सर्वप्रथम  गौ  ग्रास  निकालें  व  गैया -मैया  को  भेंट  दें  !!
9-गैया  व  सांड  में  भेद-बुद्धि  रखना  (दोंनो  ही  गौ  वंश  हैं  -पूज्यनीय  हैं  ) महापाप  है  !!
10-अपनी  आय  का  दशमांश  गौ -सेवा  में  अर्पित  करें  !!
11-मृत  गाय  को  भी  कसाई  को  न  दें  - मृत  गाय  की  विधिवत  अंत्येष्टि  परमावश्यक  है  !!
नोट -प्रतिज्ञा  करें  में  श्रेष्ठ  सनातन  धर्मं-संस्कृति  का  अंश  हूँ  अतः  मेरी  गौ -सेवा  में  निष्ठां  है  -मैं  गोपाल  जी  की  पूजा  गैया - मैया  की  सेवा  मानता  हूँ  !!

जय -जय   श्री  राधेश्याम 
गावो  विश्वस्य  मातरः 
गौ  सेवा  हि  परमो  धर्मः 

गैया-मैया की जय 
स्वीट राधिका राधे-राधे 
स्वीट राधिका राधे-राधे 

♥♥स्वीटी राधिका♥ .... राधे- राधे


श्रीजी मति मेरी हुई - गध्य बन गए छंद !
श्यामसुन्दर मन में बसे - राधे -राधे कन्त !!
जा दिन सखि मोहन मिले - हेरि मोय स्वीटी आय !
गीत रचूँ प्रिया-लाल के - और न कछू सुहाय !!
कथा -प्रसंग मेरे कान्ह के - मेरे जीवन लाभ !
गाऊं रसिकन रस सुधा - बने नन्दलाल मेरे भाव !!

श्री राधेश्याम पद -पंकज आशा !
भक्त -भक्ति -गुरु करहिं प्रकाशा !!
जय -जय श्री ब्रषभानुजा ! जय -जय नन्द किशोर !!
जय गोपी चित चोर प्रभु ! जय -जय रसिकन सिर मोर !!
माखन चाखन हार प्रभु - कुंजन करें निवास !
श्री प्रिया जू की टहलनी - करि राखें प्रीति की आस !!
राधे -राधे !!






देखे वनमाली सुन सजनी !!
चहुँ ओर नील शोभा छाई ,
बसी ह्रदय मेरे छवि पीताम्बर !
वह गुंजमाल मेरे मन भाई !!
देखे वे नयन सखि कजरारे !
छवि मोर-पखा मेरे मन भाई !!
मकराकृत कुंडल की छवि लखि !
सुध-बुध सखि मेरी बिसराई !!
कंकन माधुरी में निज कूँ निरखि !
मैं मधुर लाज में घिर आई !!
पद पंकज मेरे प्रभु सजनी !
मैं निरखि छटा अति ललचाई !!
मुसकाय जो वोले मोसों सखि !
मेरे श्रवण सुधा अनुपम पाई !!
स्वीटी वोले मोहे प्राण-प्यारे !
मृदु मधुर मनोहर मन भाई !!
मोहे ऐसी उमंग अनोखी लगी !
राधे-राधे श्याम रस रीति पाई !!
"स्वीट राधिका" कहे सुन आली !
बिनु याचे हि सब मन्नत पाई !!
श्री राधे
तेरी मेरी प्रीति पुरानी - २
स्वीट राधिका प्रीति पुरानी है
ये श्यामा-श्याम कहानी है --------
राधे -राधे
राधे-राधे -स्वीट राधिका -राधे-राधे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
♥♥स्वीटी राधिका♥ .... राधे-राधे
राधे -राधे
राधे-राधे -स्वीट राधिका -राधे-राधे
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे
♥♥स्वीटी राधिका♥ .... राधे-राधे
 

Friday, June 3, 2011

फेसबुक पर जय हिंदुत्व -जय भारत इवेंट

जय श्रीराधे ! 
मित्रो , इवेंट जय हिंदुत्व-जय भारत पर रेसपोंस देने के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद !
निश्चित ही इवेंट पेजेस पर हम सबकी सम्मिलित आवाज, सनातन धर्मं एवं संस्कृति का वरदायी सन्देश "सर्वे भवन्तु सुखिनः"  के द्वारा समस्त चराचर को सुख-शांति  प्रदत्त कर ,, परम मंगलकारी अभिलाषा "बसुधैव कुटुम्बम " के अंचल में ...विनाशकारी आतंकबाद,शत्रुता,राग-द्वेष,छल एवं दंभ को समूल नष्ट कर ..
जन-जन में भगवान श्रीकृष्ण कृपा स्वरुप -भारत सन्देश श्रीमद भगवदगीता को प्रचारित कर इस मातृस्वरुप 
परम कल्याणकारी वसुंधरा को सुशोभित करेगी  ! 
हमारी विश्वजई ध्वनि हुँकार  सत्य-सनातन  विरोधियों जिनकी मंशा-कुकृत्य भारत राष्ट्र-भारत धर्मं  को आघात देने की रहती है  ,के कलुषित हृदयों को विदीर्ण कर उन सबका मान-मर्दन कर इस धरा से वहिष्कृत करने में सक्षम  है ! अतः मित्रो , मुझे विश्वास है कि आप सब इवेंट पेजेस पर एक बार जयकारा घोष लगायेंगे-(कम से कम एक बार जय हिंदुत्व -जय भारत अवश्य लिख अपनी सम्मति प्रदान करेंगे )
मित्रो ,आप धर्म सेवा -राष्ट्र सेवा में प्रस्तुत सन्देश को कॉपी-पेष्ट कर अपने सभी मित्रों-परिचितों को पोस्ट करेंगे ...मैं "स्वीट राधिका राधे-राधे" आपको भरोसा देती हूँ कि यह कार्य-सेवा ( पोस्ट करना ) आपको  भगवान श्रीकृष्ण की अहैतुकी -अपरम्पार कृपा भक्ति प्रदान करेगा !! आप माँ भारती का वात्सल्य स्नेह प्राप्त कर सत्य की ओर आरुढ़ित होंगे !   
राधे-राधे श्याम 
जय सीताराम 
पार्वती पत्ये हर-हर महादेव !! 
जो बोले सो विजय-सनातन धर्मं की जय !! 
विश्व का कल्याण हो!! 
गौमाता की जय !!
अधर्म का नाश हो !!
पापियों का संहार हो !!  
मित्रो, आप भी निम्नांकित लिंक के द्वारा ..वरदाम-सुखदाम इवेंट जय हिंदुत्वा-जय भारत से जुड़कर अपने परिचित-मित्रों को इवेंट में भाग लेने को कह सकते हैं !
अंत में मेरी (स्वीट राधिका राधे-राधे  की )आप सबसे विनम्र निवेदन है कि  -परम कल्याण सोपान-भक्ति प्रदायी-मंगल मूर्ति-आनंद राशि -पाप नाशक -कलि ताप निवारक (इस इन्टरनेट रूपी घन -घोर कलियुग पर अनंत फलदायी ) आश्रित वांछा कल्पतरु श्रीहरि नाम सुधामृत का गान करते हुए न्यूनतम एक बार  हरिनाम महामंत्र अवश्य लिखें -सभी मित्रों को पोस्ट कर लिखने का आग्रह करें -

श्री प्रियालाल रस सेवी आदरणीय  भक्तजन -आइये 
श्री किशोरीजू-श्रीकृष्ण कांता -श्रीकृष्ण प्रिया- श्री ब्रषभानु दुलारी -श्री वृन्दावनेश्वरी -श्री राधिका जी के पावन-आह्लाद बर्षी-भक्त मन मधुकर मधुर पराग रस रूपी युगल चरणारविंदों  में प्राथना-चित्त समर्पित करते हुए -
गाते-गाते लिखें-
हरेकृष्ण-हरेकृष्ण कृष्ण-कृष्ण हरे-हरे !
हरेराम-हरेराम राम-राम हरे-हरे !!
जय-जय श्री राधे श्याम !! 

Monday, May 30, 2011

यहाँ डाल डाल और पात पात श्री राधे राधे होय।



वृन्दावन धाम कौ वास भलौ, जहाँ पास बहै यमुना पटरानी।
जो जन न्हाय के ध्यान करै, बैकुण्ठ मिले तिनको रजधानी॥



ब्रज का हृदय श्रीवृन्दावन धाम श्री प्रिया-प्रियतम की नित्य नवरस केलि से आच्छादित है। यहाँ की पावन भूमि नित्य नव कुँज, पुष्प, लताओं से घिरी रहती है। यमुना जी के पावन किनारों पर कदम्ब, तमाल आदि के वृक्ष बल्लरियाँ श्री युगल सरकार की नित्य लीलाओं को प्रकट कराने के लिये आतुर रहते हैं और यही विचार करते रहते हैं कि कब प्यारे श्याम सुन्दर आयें और हमें भी अपनी लीलाओं का प्रतिभागी बनायें। यहाँ के वन-उपवन, कुँज-निकुँज, कुण्ड-सरोवर, यमुना के पावन तट आदि श्याम सुन्दर की लीलाओं के प्रत्यक्ष साक्षी हैं। श्रीवृन्दावन प्रभु के गोलोक धाम का ही प्रतिबिम्ब है। यह नित्य निरंतर शास्वत है। इस नित्य लीला धाम के प्रकट होने पर श्री प्रिया-प्रियतम आ विराजते हैं-अपने दिव्य रस से अभिसिंचित परिवेष में अपनी रासेश्वरी प्रियाजू एवं प्रिय सखियों सहित अपनी विभिन्न लीलायें सम्पन्न करते हैं। इन लीलाओं का परिपूर्ण वर्णन शब्दों में व्यक्त करना बहुत कठिन हैं, क्योंकि इन्हें तो अपने मन को एकाग्र कर प्रभु की इन चिन्मय लीलाओं में खोकर इस रस को नेत्रों से पान किया जाता है और कानों से सुना जाता है।

सभी गोकुलवासी कंस के आतंक से भयभीत थे। तब गोप उपनन्द जी ने सुझाव दिया कि यमुना के पार एक सुन्दर वृन्दावन है जहाँ अनेक वृक्ष, वन, पावन यमुना, गोवर्धन पर्वत आदि हैं। यह स्थान हमारे लिये तो सुरक्षित है ही, हमारी गायों के लिये भी विचरण करने हेतु यहाँ अनेक वन हैं। सभी गोकुलवासी इस पर सहमत हो गये और उन्होंने वृन्दावन को अपना निवास स्थल बनाया। गोवर्धन, बरसाना, नन्दगाँव आदि भी वृन्दावन की परिसीमा में आते थे।
धन वृन्दावन धाम है, धन वृन्दावन नाम। धन वृन्दावन रसिक जो सुमिरै स्यामा स्याम।
श्रीकृष्ण जी ने कहा है - वृन्दावन मेरा निज धाम है। इस वृन्दावन में जो समस्त पशु, पक्षी, मृग, कीट, मानव एवं देवता गण वास करते हैं वे मेरे ही अधिष्ठान में वास करते हैं और देहावसान के बाद सब मेरे धाम को प्राप्त होते हैं। वृन्दावन के वृक्ष साक्षात कल्पतरु हैं यहाँ की भूमि दर्पण के समान एवं मन्दिर, गौशाला स्थानों की भूमि तो चिन्तामणि स्वरूप, सर्व अभिलाषाओं की पूर्ति करने में समर्थ है।

वृन्दावन के वृक्ष को मरम न जाने कोय, यहाँ डाल डाल और पात पात श्री राधे राधे होय।

वृन्दावन की छवि प्रतिक्षण नवीन है। आज भी चारों ओर आराध्य की आराधना और इष्ट की उपासना के स्वर हर क्षण सुनाई देते हैं। कोई भी अनुभव कर सकता है कि वृन्दावन की सीमा में प्रवेश करते ही एक अदृश्य भाव, एक अदृश्य शक्ति हृदय स्थल के अन्दर प्रवेश करती है और वृन्दावन की परिधि छोड़ते ही यह दूर हो जाती है।

अष्टछाप कवि सूरदास जी ने वृन्दावन रज की महिमा के वशीभूत होकर गाया है-

हम ना भई वृन्दावन रेणु,
तिन चरनन डोलत नंद नन्दन नित प्रति चरावत धेनु।
हम ते धन्य परम ये द्रुम वन बाल बच्छ अरु धेनु।
सूर सकल खेलत हँस बोलत संग मध्य पीवत धेनु॥

Thursday, May 5, 2011

अक्षयतृतीया


भायँ कुभायँ अनख आलसहूँ ! नाम जपत मंगल दिसि दसहूँ !!
सुमिरि सो नाम राम गुन गाथा ! करउँ नाइ रघुनाथहि  माथा !! 
मोरि सुधारिहि सो सब भाँती !जासु कृपा नहिं कृपाँ अघाती !! 
राम सुस्वामि कुसेवकु मोसो ! निज दिसि देखि दयानिधि पोसो !!


जय सिया राम 
हरेकृष्ण हरेकृष्ण कृष्णकृष्ण हरेहरे-हरेराम हरेराम रामराम हरेहरे 
स्वीट राधिका राधे-राधे 
अक्षयतृतीया के पावन अवसर पर श्रीधामवृन्दावन में श्री बाँकेबिहारीजी महाराज के चरण दर्शन कर गौडीय संप्रदाय के सभी मंदिरों में श्री युगलसरकार भगवान श्री राधिका श्यामसुन्दर जी के सर्वांग चन्दन दर्शन कर लाभान्वित हों , कल्प कथानुसार भगवान परसुराम के प्राकट्य दिवस के रूप में अक्षयतृतीया को संकल्प बद्ध हों कि हे हरि ! मैं अपने निश्चर रूपी अवगुणों पर विजय प्राप्त कर रामकृपा रूपी सद्गुणों की छाँव में सत्यम-शिवम्-सुन्दरम जीवनधारा-जीवनआनंद प्राप्त करूँ !!
-राधे-राधे - 
 

Monday, May 2, 2011

bhakti-bhakt-bhagavant guru chatur naamu vapu ek--

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
-shri radhey-
bhakt hamare mukut mani - main bhaktan ko daas ! 
 bhaktan hit ya jagat men - main nitya karun brajvaas !! 
 bhaktan pag sammukh sada - nayana mere aru bhal ! 
 bhakt prem rajju bandhu - main bhaktan pran gopal !! 
shri radhey-radhey gaay ke - bhaktan terun bulay !
mili keli braj men karun - aiso mero subhay !!
sweet radhika-radhey-radhey